Tuesday, November 24, 2015

असहिष्णुता



असहिष्णुता ....एक ऐसा शब्द, जो कुछ दिनों से मेरे कानो को भेद रहा था और मै ठहरा अनपढ़, गवार, और एक नंबर का आलसी आदमी, मुझे बस अपना काम करना आता है | रोज खाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है | मुझे इससे क्या, की देश के प्रधानमंत्री, किस देश के दौरे पर है या इस देश में कितना कला धन आया | मुझे तो प्रधानमंत्री जी द्वारा किया "अच्छे दिनों" वाला वादा भी याद ना रहा | तो मुझे इस भरी भरकम शब्द "असहिष्णुता" से क्या मतलब, जिसके उच्चारण हेतु मुझे सपथ पत्र की ही भाती रट्टा लगाना पड़ता है, लेकिन मंच पर बोलते समय जुबान फिसलन के कारण "अपेक्षित" का "उपेक्षित" हो ही जाता है | लेकिन फिर भी मैंने इस शब्द की चर्चा के कारण इसके महत्त्व को जानने की कोशिश की, लेकिन अखबारों में तथाकथित विद्वानों और इस देश के महान नेताओं के वक्तव्यों और उनके विचारों को सुनाने के बाद भी कुछ समझ में ना आया | सभी विद्वानों का यही मानना था कि कुछ तो गड़बड़ है | देश में असहिष्णुता बढ़ तो रही है | तो मुझे एक बात समझ में आयी की इन्हें हो न हो देश में बढ़ती हुयी असहिष्णुता दिख तो रही है, मैंने तय किया अब मै भी देखूंगा की यह असहिष्णुता दिखती कैसी है, और यह पहले कहाँ थी, और अब बढ़कर कहाँ तक पहुँच गयी है | मैंने गाँव में ढूढा, कई लोगो से पूछा - "भाई ये असहिष्णुता कहाँ रहती है और कैसे बड़ी है?"
लेकिन किसी ने नहीं बताया तो मैंने सोचा शायद यह असहिष्णुता शायद सिर्फ शहरों में निवास करती है, अगर गाँव में होती तो किसी ना किसी को तो दिखती | मैंने सिर्फ यह सोचकर संतोष कर लिया की कल काम के लिए शहर में जाउंगा तो वहां किसी पढ़े-लिखे टाई वाले से पूछूँगा | लेकिन वहां पूछने पर भी उत्तर नदारद मिला | अंत में मैंने यह सोचकर इस असहिष्णुता के मिलने की आशा छोड़ दी की शायद यह सिर्फ नेताओं और राजनितिक समझ रखने वाले लोगो को ही दिखती है  | लेकिन घर आने के बाद उसी रात मुझे समझ में आया की यह सभी लोग सही कह रहे थे, इस देश में असहिष्णुता बहूत बढ़ गयी है | दरअसल आप तो जानते है की जिस घर में मै रहता हूँ, वहां मेरे सथ मेरे कुछ खटमल मित्र भी रहते है | हुआ यूं की उसी रात मै जब सोया था तभी मेरे कुछ  खटमल मित्र आये और मुझे नोचने लगे | तत्पश्चात, मेरी नीद भी खुल गयी, उठकर देखा तो ये मुझे जैसे नोच डालना चाहते थे | मैंने लाख समझाने पर वह किसी तरह माने | मैंने इसका कारण जानना चाह तो उन्होंने भी देश में बढ़ती असहिष्णुता का हवाला दिया, अब मै चकीत हो उनकी बाते सुनाने लगा | उन्होंने समझाया की इस बढ़ती असहिष्णुता के प्रभाव से वह भी वंचीत नहीं है| लोग बढ़ती असहिष्णुता से डरे हुए है, और रातो को सो नहीं पाते, और मेरे खटमल मित्रो को कई दिनों से भूखे पेट सोना पड़ता था | इन इंसानों में बढ़ती असहिष्णुता  का शिकार मेरे खटमल मित्र हो रहे थे | उनका कहना था की अगर इस देश में इसी तरह असहिष्णुता बढ़ती रही, तो मजबूरन पलायन कर जायेंगे | अंततः तब जाकर मुझे असहिष्णुता की एक झलक देखने को मिली, और बढ़ती असहिष्णुता के कारण भविष्य के संकट को देख सका |

सभी को सहिष्णुता वाला "नमस्कार" |
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